क्या इस गिरते बाज़ार में मुझे अपने म्यूचुअल फंड्स बेच देने चाहिए?

एक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर अक्सर निवेशकों के कई सवालों के जवाब देने पड़ते हैं जैसे क्या म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने का ये सही समय है, या फिर बाज़ार के गिरने पर क्या मैं अपने फंड्स को लिक्विडेट कर लूँ, या फिलहाल कुछ महीनों के लिए अपनी एसआईपी बंद कर दूँ? या फिर फिलहाल तो बाज़ार का प्रदर्शन अच्छा नहीं है तो मैं इसमें और पैसा क्यों लगाऊँ वगैरह वगैरह।

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Vishal Chandani (AMFI-Registered Mutual Fund Distributor)

3/12/20261 min read

एक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर हमारा काम सिर्फ निवेशकों को म्यूचुअल फंड से संबंधित सलाह देना न होकर उन्हें सही समय पर अपने निर्णय पर विश्वास रखने और धैर्य बनाए रखने की सलाह देने का भी होता है। हाल के भू-राजनीतिक हालातों पर नज़र डालें तो इन सवालों की तादाद और डर काफी ज़्यादा बढ़ गए हैं।

क्या बाज़ार पहली बार गिरा है?

जो निवेशक पिछले 3-4 साल से ही बाज़ार से जुड़े हैं उन्होंने ऐसा करेक्शन पहली बार देखा है। म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने से पहले ये निवेशक परंपरागत निवेश उत्पादों जैसे कि फिक्स्ड डिपॉज़िट के मुरीद रहे हैं जिसमें रिटर्न्स गारंटीड होते हैं ,भले वो महंगाई दर से कम ही क्यों न हों। ऐसे निवेशकों के लिए डरना लाज़मी है। लेकिन जो भी निवेशक पिछले 15-20 साल या उससे भी ज़्यादा से म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते आ रहे हैं वो ये बात जानते हैं कि चाहे साल 2026 की ये गिरावट हो या 2020 का कोविड का दौर या फिर साल 2008 की गिरावट या फिर उससे पहले के भी कई सारे मौके, बाज़ार हर गिरावट के बाद वापस मज़बूत स्थिति में वापस खड़ा हुआ है। ज़रा सोचिए, अगर कोई निवेशक साल 2008 में ही ये मान लेता कि बाज़ार अब वापस उठ नहीं पाएगा और वो अपना पैसा बाज़ार से निकाल लेते तो उनका क्या नुकसान हुआ होता?

यहाँ मैंने तीन म्यूचुअल फंड्स को उदाहरण के तौर पर लिया है जिससे कि मैं आपको अपनी बात आसानी से समझा सकूँ। ये कोई म्यूचुअल फंड खरीदने का रेकमेंडेशन नहीं है, सिर्फ एक उदाहरण है जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कैसे हर बड़ी गिरावट के बाद, बाज़ार ने खुद को संभाला भी है और लॉन्ग टर्म ग्रोथ भी दी है।

एक तरफ गिरे हुए बाज़ार में पैसा निकालकर निवेशक अपना नुकसान बुक करते हैं । दूसरी तरफ लॉन्ग-टर्म में होने वाले मुनाफे से भी चूक जाते हैं

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

हाल ही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर निफ्टी 50 इंडेक्स के ३० साल पूरे होने पर, सेबी चेयरमैन तुहिन कान्त पांडे ने इस ग्लोबल उथल-पुथल में निवेशकों को धैर्य बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत के डोमेस्टिक फंडामेंटल्स मज़बूत बने हुए हैं। राहुल सिंह, टाटा एसेट मैनेजमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर ने हाल ही में एक बिज़नेस न्यूज़पेपर को दिए गए ई-मेल इंटरव्यू में कहा कि शेयर बाज़ार का रिस्क-रिवार्ड रेशियो अब लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के पक्ष में आ चुका है।

एक निवेशक के तौर पर आपको क्या करना चाहिए?

सबसे पहले तो किसी AMFI-Registered Mutual Fund Distributor से अपना म्यूचुअल फंड् पोर्टफोलियो रिव्यू करवाएँ ताकि वो आपको म्यूचुअल फंड्स से संबंधित सही गाइडेंस दे सकें। दूसरा, अगर आपको तुरंत पैसों की ज़रूरत है, तो आप लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड्स भी ले सकते हैं। इससे, आपके म्यूचुअल फंड्स इन्वेस्टेड रहेंगे और आपकी तुरंत पैसों की ज़रूरत भी पूरी हो सकती है।

इस पोस्ट के लेखक, AMFI-Registered Mutual Fund Distributor हैं

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