इन गलतियों से आपका मोटर इंश्योरेंस क्लेम हो सकता है खारिज

अधिकांश लोग मोटर इंश्योरेंस यह सोचकर लेते हैं कि दुर्घटना, चोरी या अचानक नुकसान की स्थिति में यह अपने आप सुरक्षा देगा। लेकिन सच्चाई यह है कि इंश्योरेंस कंपनियाँ कई बार क्लेम को अस्वीकार कर देती हैं, भले ही पॉलिसीधारक को मामला पूरी तरह सही लगे। अक्सर क्लेम रिजेक्शन का कारण बड़ी धोखाधड़ी नहीं होती, बल्कि छोटी-छोटी गलतियाँ, देरी या पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन होता है।

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4/1/20261 min read

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अधिकांश लोग मोटर इंश्योरेंस यह सोचकर लेते हैं कि दुर्घटना, चोरी या अचानक नुकसान की स्थिति में यह अपने आप सुरक्षा देगा। लेकिन सच्चाई यह है कि इंश्योरेंस कंपनियाँ कई बार क्लेम को अस्वीकार कर देती हैं, भले ही पॉलिसीधारक को मामला पूरी तरह सही लगे। अक्सर क्लेम रिजेक्शन का कारण बड़ी धोखाधड़ी नहीं होती, बल्कि छोटी-छोटी गलतियाँ, देरी या पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन होता है।

वाहन मालिकों को ऐसी परेशानियों से बचाने के लिए, नीचे कुछ आम गलतियाँ दी गई हैं जो क्लेम रिजेक्शन का कारण बन सकती हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है।

1. पॉलिसी का समय पर नवीनीकरण न करना

सबसे साधारण लेकिन सबसे महँगी गलती यह है कि लोग समय पर मोटर इंश्योरेंस रिन्यू करना भूल जाते हैं। यदि पॉलिसी लैप्स होने के बाद दुर्घटना होती है, तो इंश्योरेंस कंपनी भुगतान करने की जिम्मेदार नहीं होती, क्योंकि उस समय कवरेज सक्रिय नहीं था।

कुछ मामलों में, ब्रेक के बाद पॉलिसी रिन्यू करने पर वाहन निरीक्षण की जरूरत पड़ सकती है और नो क्लेम बोनस जैसी सुविधाएँ भी खत्म हो सकती हैं।

क्या करें: रिमाइंडर सेट करें और पॉलिसी समाप्त होने से पहले रिन्यू कराएँ।

2. दुर्घटना या चोरी की सूचना देने में देरी करना

इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों के अनुसार दुर्घटना या चोरी की स्थिति में पुलिस और इंश्योरेंस कंपनी को तुरंत सूचना देना जरूरी होता है। यदि FIR दर्ज कराने या कंपनी को सूचना देने में देरी होती है, तो इसे अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन माना जा सकता है।

अदालतें कभी-कभी देरी को स्वीकार कर सकती हैं यदि कारण उचित हो और FIR समय पर (आदर्श रूप से 24 घंटे के भीतर) दर्ज हो गई हो। लेकिन देरी, विवाद और रिजेक्शन की संभावना बढ़ा देती है।

क्या करें: चोरी या दुर्घटना की रिपोर्ट जल्द से जल्द करें, बेहतर होगा पहले 24 घंटे के भीतर।

3. सर्वे से पहले वाहन की मरम्मत करवा देना

दुर्घटना के बाद कई लोग जल्दी मरम्मत करा लेते हैं ताकि वाहन का उपयोग फिर से शुरू हो सके। लेकिन यह कदम नुकसानदायक हो सकता है। आमतौर पर इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम पास करने से पहले सर्वेयर द्वारा नुकसान की जांच करवानी होती है।

यदि वाहन की मरम्मत पहले ही कर दी गई हो, तो कंपनी यह कह सकती है कि नुकसान की वास्तविक वजह और स्तर की पुष्टि संभव नहीं है, और क्लेम रिजेक्ट कर सकती है। केवल वाहन को हटाने या सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए आवश्यक छोटी मरम्मत ही मान्य हो सकती है।

क्या करें: सर्वे होने तक मरम्मत न कराएँ।

4. वैध ड्राइविंग लाइसेंस न होना

चाहे आप कितने भी अच्छे ड्राइवर हों, दुर्घटना के समय आपके पास वैध लाइसेंस होना जरूरी है। यदि लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है, अमान्य है, या वाहन के प्रकार के अनुसार सही नहीं है, तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।

क्या करें: लाइसेंस की वैधता और वाहन श्रेणी का ध्यान रखें।

5. शराब या नशे की हालत में वाहन चलाना

यदि दुर्घटना के समय ड्राइवर शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में पाया जाता है, तो इंश्योरेंस कंपनी लगभग हमेशा क्लेम रिजेक्ट कर देती है। इसे कानूनी और पॉलिसी दोनों शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।

नशे की हालत में वाहन चलाना लापरवाही और जोखिमपूर्ण व्यवहार माना जाता है।

क्या करें: शराब या नशे के बाद वाहन बिल्कुल न चलाएँ।

6. निजी वाहन को व्यावसायिक कार्य में इस्तेमाल करना

कई लोग अनजाने में अपने निजी वाहन का उपयोग डिलीवरी, सवारी ढोने, या किसी अन्य भुगतान वाले कार्य में करते हैं। यह पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।

इंश्योरेंस प्रीमियम वाहन के घोषित उपयोग पर आधारित होता है। व्यावसायिक उपयोग से जोखिम बढ़ता है और यदि पॉलिसी में यह घोषित नहीं है, तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।

क्या करें: यदि वाहन व्यावसायिक उपयोग में आता है तो बीमा लेते समय संबंधित RTO एवं बीमा कंपनी को सूचना दें।

7. वाहन में बदलाव (मॉडिफिकेशन) की जानकारी न देना

वाहन में बदलाव करके इंश्योरेंस कंपनी को सूचना न देना क्लेम रिजेक्शन का बड़ा कारण बन सकता है। यह विशेष रूप से CNG किट लगाने के मामलों में देखा जाता है।

ऐसे बदलाव वाहन का जोखिम प्रोफाइल बदल देते हैं। यदि मॉडिफिकेशन घोषित नहीं किया गया, या वह अनुमोदित/प्रमाणित नहीं है, तो इंश्योरेंस कंपनी क्लेम अस्वीकार कर सकती है।

क्या करें: किसी भी संरचनात्मक या ईंधन-संबंधित बदलाव की सूचना तुरंत RTO एवं इंश्योरेंस कंपनी को दें।

8. चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज कर नुकसान बढ़ा देना

वाहन में चेतावनी संकेत दिख रहे हों और मालिक फिर भी गाड़ी चलाता रहे, तो इंश्योरेंस कंपनी इसे लापरवाही मान सकती है।

ऐसी स्थिति में कंपनी यह कहकर क्लेम रिजेक्ट कर सकती है कि नुकसान टाला जा सकता था।

क्या करें: चेतावनी संकेत दिखते ही वाहन रोकें और तुरंत जांच करवाएँ।

निष्कर्ष

मोटर इंश्योरेंस तभी लाभदायक होता है जब पॉलिसीधारक पॉलिसी की शर्तों का पालन करे। कई क्लेम इसलिए रिजेक्ट नहीं होते कि घटना झूठी थी, बल्कि इसलिए कि बीमित व्यक्ति ने रिपोर्टिंग, दस्तावेज़, या वाहन उपयोग से जुड़ी शर्तों को पूरा नहीं किया।

समय पर रिन्यूअल, तुरंत रिपोर्टिंग, और सुरक्षित ड्राइविंग, कर के आप क्लेम रिजेक्शन से बच सकते हैं और जरूरत के समय सही सुरक्षा पा सकते हैं।

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